लेखनी कहानी -29-Nov-2022
यादों के सहारे
याद करते रहे तुम्हें दिन ढ़ल गया,
रात के साए में चाँद पिघल गया,
तू क्या गया महबूब मेरे,
जिंदगी का सफर थम गया।
कदम बढ़ाकर देखा होले-होले,
पीछे हट गया पिया बिन कुछ बोले,
विरह का बादल ये कैसा छाया,
तेरी यादों के सहारे बस मन मेरा डोले।
हिलोर उठती मन भँवर में,
विरह की अग्नि जली हृदय में,
क्या करुँ कुछ समझ न पाऊँ,
खो गयी मैं बीते दिनों में।
चाहत मन में बस पिया मिलन की,
अमावस रात में चाँद खिलन की,
कैसा प्रेम रंग तेरा चढ़ा,
राह देखूँ तेरे आगमन की।
न तडपा अब मुझको पिया,
देर न कर अब थाम जिया,
आजा रे अब आ भी जा,
देख विरहन ने श्रृंगार किया।
श्वेता दूहन देशवाल मुरादाबाद उत्तर प्रदेश
#यादों का झरोखा
Gunjan Kamal
04-Dec-2022 05:33 PM
शानदार
Reply